विचारों का क्या है..?
उग आते हैं खाली दिमाग में,
कुकुरमुत्ते से,
बिना किसी श्रम के, साधन के,
और विचारवान..?
निरे, निठल्ले, निकम्मे,
हवाई किले बनाने वाले,
जिनका
यथार्थ संसार से कोई लेना-देना नही,
छोटी छोटी
सांसारिक घटनाओं में,
अव्यक्त अनुभूतियों को
देख लेने वाले,
बीज में से,
विशाल वृक्ष की ध्वनि
सुन पाने वाले,
वर्तमान से भविष्य को
झांक लेने वाले,
मोटी मोटी किताबों में
ऐनक वाली आंखें खपाने वाले,
बालों और दाढ़ी की उलझी हुई
हर पेंच में सुलझे हुए विचारों की
खेप खोजने वाले विचारवानों से
भला क्या मिला है समाज को..?
नाहक विचारवान..!