Tuesday, May 30, 2023

वो लहर और है..

 गजल, गीत, कविता ये हुनर और है,

चले जिस राह पर वो सफर और है,


चुरा लूँगा समय की पूंजी से उन लम्हों को,

जो तेरे साथ बीते वो शामों सहर और है,


निगाहे जद तेरे सिवा दिखता कुछ भी नही,

तेरी निगाह का पड़ा जो असर और है,


तसव्वुर तेरा सागर सा गहरा तो है लेकिन,

के जिस पर सवार है नयन वो लहर और है,


© दिनेश धीवर 'नयन' 

हम भुला बैठे...

 हम अपनी बेमुरव्वत ख़्वाहिशों को फिर सजा बैठे,

जो छूटा सबका दर तो अब तेरी चौखट पे आ बैठे,


कोई समझे न समझे पर तुम्हें ये समझना होगा,

के तेरा नूर पाने को हम अपना घर जला बैठे,


मयस्सर हो न हो खुशियाँ जमाने की नहीं मतलब,

तेरे आगोश में आने को सब कुछ हम भुला बैठे,


के समझे जब से तेरा मूल्य तब से होश में आए,

हुए फिर इस कदर बेहोश की कीमत गिरा बैठे,


नयन भर देख ले इक बार उतर जा मेरे सीने में,

फिकर क्या फिर के हम दोनों यहाँ बैठें वहाँ बैठें,


© दिनेश धीवर 'नयन'

नाहक विचारवान

 विचारों का क्या है..? उग आते हैं खाली दिमाग में, कुकुरमुत्ते से, बिना किसी श्रम के, साधन के, और विचारवान..? निरे, निठल्ले, निकम्मे,  हवाई क...