गजल, गीत, कविता ये हुनर और है,
चले जिस राह पर वो सफर और है,
चुरा लूँगा समय की पूंजी से उन लम्हों को,
जो तेरे साथ बीते वो शामों सहर और है,
निगाहे जद तेरे सिवा दिखता कुछ भी नही,
तेरी निगाह का पड़ा जो असर और है,
तसव्वुर तेरा सागर सा गहरा तो है लेकिन,
के जिस पर सवार है नयन वो लहर और है,
© दिनेश धीवर 'नयन'
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