आईना, देखकर मुझे फिर से, मुस्कुराया है,
के उस अंदाज़ से उसने मुझे सजाया है,
विस्वास, उम्मीद खुशी स्नेह और आंसू,
क्या बचाया उसने जो, मुझ पर नही लुटाया है,
मेरी बिखरी हुई खुशियों को मुकम्मल करने,
बिना वजह वो अब तक मुस्कुराया है,
मैं जब भी मंदिरों के द्वार तक गया हूँ कभी,
वो एक शख्स मुझे याद बहुत आया है,
कोइ होता है फरिस्ते सा देखा तुमने,
मुझे लाखों में वो एक नज़र आया है,
कोई ऐसे ही 'नयन' दिल में नहीं बस जाता,
उसने हज़ार बार मेरी गलतियों को भुलाया है,
दिनेश धीवर 'नयन' -----
के उस अंदाज़ से उसने मुझे सजाया है,
विस्वास, उम्मीद खुशी स्नेह और आंसू,
क्या बचाया उसने जो, मुझ पर नही लुटाया है,
मेरी बिखरी हुई खुशियों को मुकम्मल करने,
बिना वजह वो अब तक मुस्कुराया है,
मैं जब भी मंदिरों के द्वार तक गया हूँ कभी,
वो एक शख्स मुझे याद बहुत आया है,
कोइ होता है फरिस्ते सा देखा तुमने,
मुझे लाखों में वो एक नज़र आया है,
कोई ऐसे ही 'नयन' दिल में नहीं बस जाता,
उसने हज़ार बार मेरी गलतियों को भुलाया है,
दिनेश धीवर 'नयन' -----