ज़रा सी बात पर मिट्टी सा टूट जाता हूं,
ज़रा सी बात पर खुल के खिलखिलाता हूं
मुझे मालुम है के वो छल कर रहा है मुझसे
ये मेरी जहनियत के मैं फिर भी मुस्कुराता हूं
बनाए बेशक कोई निशाना ए खंजर मुझको
अगर अपना हो तो सीना नही छिपाता हूं,
कोई बच्चा किसी दालान में जब खेलता मिले
मैं फिर फिर लौट के बचपन को जी आता हूं,
अगर खुशी मिलती है तुझको मुझे सताने से
तु आजमा मुझे मैं तुझको आजमाता हूं,
कोई किरचा फंसा सा है 'नयन' के किसी कोने में,
निकल ही आते हैं आंसु मैं जब भी मुस्कुराता हूं
दिनेश धीवर 'नयन'
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