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Saturday, June 10, 2023

मैं जब भी मुस्कुराता हूं

 ज़रा सी बात पर मिट्टी सा टूट जाता हूं,

ज़रा सी बात पर खुल के खिलखिलाता हूं


मुझे मालुम है के वो छल कर रहा है मुझसे 

ये मेरी जहनियत के मैं फिर भी मुस्कुराता हूं 


बनाए बेशक कोई निशाना ए खंजर मुझको 

अगर अपना हो तो सीना नही छिपाता हूं,


कोई बच्चा किसी दालान में जब खेलता मिले 

मैं फिर फिर लौट के बचपन को जी आता हूं,


अगर खुशी मिलती है तुझको मुझे सताने से 

तु आजमा मुझे मैं तुझको आजमाता हूं,


कोई किरचा फंसा सा है 'नयन' के किसी कोने में,

निकल ही आते हैं आंसु मैं जब भी मुस्कुराता हूं


दिनेश धीवर 'नयन'

Tuesday, May 30, 2023

हम भुला बैठे...

 हम अपनी बेमुरव्वत ख़्वाहिशों को फिर सजा बैठे,

जो छूटा सबका दर तो अब तेरी चौखट पे आ बैठे,


कोई समझे न समझे पर तुम्हें ये समझना होगा,

के तेरा नूर पाने को हम अपना घर जला बैठे,


मयस्सर हो न हो खुशियाँ जमाने की नहीं मतलब,

तेरे आगोश में आने को सब कुछ हम भुला बैठे,


के समझे जब से तेरा मूल्य तब से होश में आए,

हुए फिर इस कदर बेहोश की कीमत गिरा बैठे,


नयन भर देख ले इक बार उतर जा मेरे सीने में,

फिकर क्या फिर के हम दोनों यहाँ बैठें वहाँ बैठें,


© दिनेश धीवर 'नयन'

नाहक विचारवान

 विचारों का क्या है..? उग आते हैं खाली दिमाग में, कुकुरमुत्ते से, बिना किसी श्रम के, साधन के, और विचारवान..? निरे, निठल्ले, निकम्मे,  हवाई क...