साँसों के तार,
बहुत से कारणों से,
जुड़े रहते हैं जीवन से,
कई इच्छाएं, वासनाएं,
महत्वाकांक्षाएं,
कुछ लक्ष्य, और प्राप्तियां,
कुछ खालीपन, कुछ रिक्तियां,
जिसे पाने और भरने
के लिए,
सांसें चलती हैं, लगातार,
.
अब अनुभव होता है,
जिसके लिए जीवन है,
वह छूटा जा रहा है,
कोई समझ न सकेगा कि,
झलक पाई है मैंने
तुझमें,
परमात्मा की,
पूरे हृदय से, तृप्त हुआ हूँ,
तुम्हे देखकर, सुनकर,
उन पलों में मैंने जी लिया,
तुम्हे,
शेष जीवन के उन पलों के लिए,
जब हम-तुम न होंगे
एक दूसरे के साथ,
उन पलों के वह निःस्वार्थ प्रेम,
की बातें,
मुझे आश्रय देंगे,
मैंने अब-तक का जो जीवन
आधा अधूरा जिया,
उसकी पूर्णता चाहता हूँ,
तुम्हे अन्तःस्थल पर अनुभव कर,
अब ये सांसें तुम्हारी अमानत
बनकर रह गईं हैं,
जीवन अब भी मूल्यवान तो है,
किन्तु तुम्हारे बिना नही,
.
मैं अब उस यन्त्र के समान हूँ,
जिसका ईंधन तुम हो,
जिसका जीवन तुम हो,
जिसका तन-मन तुम हो,
अब कुछ पाना शेष नही,
कुछ भी नही..........
.
दिनेश धीवर "नयन" -----
बहुत से कारणों से,
जुड़े रहते हैं जीवन से,
कई इच्छाएं, वासनाएं,
महत्वाकांक्षाएं,
कुछ लक्ष्य, और प्राप्तियां,
कुछ खालीपन, कुछ रिक्तियां,
जिसे पाने और भरने
के लिए,
सांसें चलती हैं, लगातार,
.
अब अनुभव होता है,
जिसके लिए जीवन है,
वह छूटा जा रहा है,
कोई समझ न सकेगा कि,
झलक पाई है मैंने
तुझमें,
परमात्मा की,
पूरे हृदय से, तृप्त हुआ हूँ,
तुम्हे देखकर, सुनकर,
उन पलों में मैंने जी लिया,
तुम्हे,
शेष जीवन के उन पलों के लिए,
जब हम-तुम न होंगे
एक दूसरे के साथ,
उन पलों के वह निःस्वार्थ प्रेम,
की बातें,
मुझे आश्रय देंगे,
मैंने अब-तक का जो जीवन
आधा अधूरा जिया,
उसकी पूर्णता चाहता हूँ,
तुम्हे अन्तःस्थल पर अनुभव कर,
अब ये सांसें तुम्हारी अमानत
बनकर रह गईं हैं,
जीवन अब भी मूल्यवान तो है,
किन्तु तुम्हारे बिना नही,
.
मैं अब उस यन्त्र के समान हूँ,
जिसका ईंधन तुम हो,
जिसका जीवन तुम हो,
जिसका तन-मन तुम हो,
अब कुछ पाना शेष नही,
कुछ भी नही..........
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दिनेश धीवर "नयन" -----
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