व्यथा किसे कहते हैं...?
क्या विरोधाभास है..?
हृदय की गति मापने का यन्त्र है, माप लीजिये, किन्तु उसी हृदय के आश्रय में उपजी व्यथा को मापने का कोई साधन नही, जबकि हृदय की गति के अनियमित होने के पीछे का कारण, उसकी व्यथा ही है,
विज्ञान की भाषा में कहें तो हृदय की गति उसकी व्यथा का अनुक्रमानुपाती या व्युत्क्रमानुपाती भी हो सकता है, क्योंकि दिल डूबता भी है, और ज़ोरों से धड़कता भी है,
पीड़ा जब घनीभूत हो जाये, कोशिकाओं को तोड़ने लगे, मन को झिंझोड़ने लगे, तो वह व्यथा बन जाती है,
व्यथा की सर्वमान्य परिभाषा दे सकना किसी के लिये सम्भव भी नही होगा, क्योंकि एक ही विषय किसी के लिए किसी के लिए सामान्य आघात, किसी के लिये खुशी का कारण, तो किसी के लिए व्यथा कारक, भी हो सकता है,
वैसे व्यथा अच्छा भाव है,
क्रोंच के रक्त से उपजी व्यथा से महाभारत का जन्म हुआ, कालिदास की व्यथा ने मेघदूतम की रचना कर डाली, तुलसी की व्यथा ने संसार को रामचरितमानस दे दिया,
"प्रसाद" भी व्यथा में ही कहते हैं,
"जीवन की गोधुली बेला में कौतुहल से तुम आये........",
"महाप्राण निराला" का जीवन भी व्यथा की ही कथा रही, वे भी कहते रहे कि,
"दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहुं, जो अब तक कहा नही.......",
महादेवी जी का दीपक आज भी जाने किस व्यथा में मधुर मधुर जल रहा है, .....
"मधुर मधुर मेरे दीपक जल, ...."
यशोधरा की अंतहीन व्यथा भी प्रासंगिक है,
"सखी वे मुझसे कह कर जाते.....",
व्यथा के इन रूपों से अनजान कोई वर्तमान मनीषी यदि इसे अवसाद से जोड़ दे नकारात्मकता से जोड़ दे, तो कहिये भूल किसकी होगी,
एक सामान्य व्यक्ति की व्यथा ने चीन की महान दीवार में बिना उपकरणों के छेद कर दिया था,
कबीर की व्यथा ने उन्हें "कबीर" बनाया,
"चलती चाकी देखकर दिया कबीरा रोय....",
राधा कहती रही कि,
"कान्हा रे तु राधा बन जा भूल पुरुष का मान,
तब होगा तुझको राधा की पीड़ा का अनुमान,"
कृष्ण का जीवन भी व्यथाओं का महाकाव्य ही है,
(पढ़ें दिनकर रचित-कृष्ण तुम एक बार फिर आ जाते)
व्यथा ही जीवन का सार है, बुद्ध ने तो यहां तक कहा, कि "संसार दुख रूप है,"
किन्तु इसकी भी अपनी एक उपलब्धि है, यही व्यथा आदमी को आदमी बनाती है, जीना सिखाती है, कुछ छोड़ने की ताकत देती है,
फिल्म बॉबी का एक गीत, ..
पंक्तियाँ,..गीतकार आनंद बख्शी साब की कलम से निकली है,
लता मंगेशकर जी की आवाज़ है----
दर्द ज़माने में कम नही मिलते,
सबको मुहब्बत में गम नही मिलते,
टूटने वाले दिल होते हैं कुछ खास.…....
दिनेश धीवर "नयन"--------
क्या विरोधाभास है..?
हृदय की गति मापने का यन्त्र है, माप लीजिये, किन्तु उसी हृदय के आश्रय में उपजी व्यथा को मापने का कोई साधन नही, जबकि हृदय की गति के अनियमित होने के पीछे का कारण, उसकी व्यथा ही है,
विज्ञान की भाषा में कहें तो हृदय की गति उसकी व्यथा का अनुक्रमानुपाती या व्युत्क्रमानुपाती भी हो सकता है, क्योंकि दिल डूबता भी है, और ज़ोरों से धड़कता भी है,
पीड़ा जब घनीभूत हो जाये, कोशिकाओं को तोड़ने लगे, मन को झिंझोड़ने लगे, तो वह व्यथा बन जाती है,
व्यथा की सर्वमान्य परिभाषा दे सकना किसी के लिये सम्भव भी नही होगा, क्योंकि एक ही विषय किसी के लिए किसी के लिए सामान्य आघात, किसी के लिये खुशी का कारण, तो किसी के लिए व्यथा कारक, भी हो सकता है,
वैसे व्यथा अच्छा भाव है,
क्रोंच के रक्त से उपजी व्यथा से महाभारत का जन्म हुआ, कालिदास की व्यथा ने मेघदूतम की रचना कर डाली, तुलसी की व्यथा ने संसार को रामचरितमानस दे दिया,
"प्रसाद" भी व्यथा में ही कहते हैं,
"जीवन की गोधुली बेला में कौतुहल से तुम आये........",
"महाप्राण निराला" का जीवन भी व्यथा की ही कथा रही, वे भी कहते रहे कि,
"दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहुं, जो अब तक कहा नही.......",
महादेवी जी का दीपक आज भी जाने किस व्यथा में मधुर मधुर जल रहा है, .....
"मधुर मधुर मेरे दीपक जल, ...."
यशोधरा की अंतहीन व्यथा भी प्रासंगिक है,
"सखी वे मुझसे कह कर जाते.....",
व्यथा के इन रूपों से अनजान कोई वर्तमान मनीषी यदि इसे अवसाद से जोड़ दे नकारात्मकता से जोड़ दे, तो कहिये भूल किसकी होगी,
एक सामान्य व्यक्ति की व्यथा ने चीन की महान दीवार में बिना उपकरणों के छेद कर दिया था,
कबीर की व्यथा ने उन्हें "कबीर" बनाया,
"चलती चाकी देखकर दिया कबीरा रोय....",
राधा कहती रही कि,
"कान्हा रे तु राधा बन जा भूल पुरुष का मान,
तब होगा तुझको राधा की पीड़ा का अनुमान,"
कृष्ण का जीवन भी व्यथाओं का महाकाव्य ही है,
(पढ़ें दिनकर रचित-कृष्ण तुम एक बार फिर आ जाते)
व्यथा ही जीवन का सार है, बुद्ध ने तो यहां तक कहा, कि "संसार दुख रूप है,"
किन्तु इसकी भी अपनी एक उपलब्धि है, यही व्यथा आदमी को आदमी बनाती है, जीना सिखाती है, कुछ छोड़ने की ताकत देती है,
फिल्म बॉबी का एक गीत, ..
पंक्तियाँ,..गीतकार आनंद बख्शी साब की कलम से निकली है,
लता मंगेशकर जी की आवाज़ है----
दर्द ज़माने में कम नही मिलते,
सबको मुहब्बत में गम नही मिलते,
टूटने वाले दिल होते हैं कुछ खास.…....
दिनेश धीवर "नयन"--------
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