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सबने उन चमकती हुईं
आंखों की खनक देखी है,
मैंने देखी है उस खनक,
में ख़ला सी लेकिन,
सबने मुस्कुराते हुए,
देखा है उनको,
मैंने देखी है होठों
की उदासी लेकिन,
मैं जानता हूं मुझे हक,
नही है उसे पाने का,
ये भी जानता हूं वो
नही है खोने सी लेकिन,
मैं कैसे मुकम्मल करूं,
उसके सामने खुद को,
उसी के सामने तो
होती है कमी सी लेकिन,
वो जहां भी रहे,
'नयन' को ना याद करे
मगर यूं भूल जाए,
ऐसा भी नही हो लेकिन,
© दिनेश धीवर 'नयन'
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