Tuesday, June 14, 2022

एक तेरे होने से

 .

   जीवन के झरते झरने में कुछ पत्थर जो अब तक सूखे,

   तुम आ जाते यदि कहीं से, तो उनमें जीवन आ जाता,


   पल-पल की जो कथा-व्यथा है, नही हो रही लिपिबद्ध अब,

   तुम होते तो कैनवास में, रंग भरा, क्षण-क्षण आ जाता,


   अब पलाश के पुष्प कहीं भी, रंग-राग के फाग न देते

   तुम होते तो उन्हीं पलाश में, चूनर और कंगन आ जाता,


   दीप पर्व के दीप हैं मद्धम, और रोशनी भी फीकी सी,

   एक तेरे होने से दीपक,  की लौ में चंदन आ जाता,


   बाग-बगीचे उपवन पर्वत, नदियों तालों के स्वर में नित,

   तुम होते तो मन भौंरे में, मूक-मधुर गुंजन आ जाता,


   इस सूने आंगन की तुलसी, में तुमने थे दीप जलाए,

   एक तेरे होने से मेरा, वही भरा,  आंगन आ जाता,


   रीत गए हैं कोर 'नयन' के लिख-लिख के मन की पाती,

   तुम होते तो अधरों के, आंचल में भी सावन आ जाता,


   © दिनेश धीवर 'नयन'

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