Tuesday, February 20, 2024

ज्योतिषीय अवधारणा

 दृश्य एक


एक कुशल और निष्णात (well educated and specialist) चिकित्सक भी जब किसी रोग को diagnos करता है तब वो भलीभांति जानता है कि वो अपने सर्वोत्तम ज्ञान या जानकारी का उस जगह पर उपयोग कर रहा है, किंतु यह भी जानता है कि उसकी यह जानकारी उसकी व्यक्तिगत ज्ञानार्जन की क्षमता और कार्यकुशलता ही है न कि समष्टिगत..!


वो अच्छी तरह से जानता है कि जिस रोग का निदान करने वह उपस्थित हुआ है उस रोग के विषय में उससे भले और जानकार लोग हैं जिन्हें हम supar specialist कहते हैं, और वो ये भी जानता है कि डॉक्टर्स का एक वर्ग ऐसा भी है जो उस रोग के विषय में दुनिया के किसी कोने में रिसर्च कर रहा होगा जिसके पास इस रोग की इस काल की सर्वोत्तम जानकारियां और निदान होंगी,


फिर भी वो अपना best देता है और result आते हैं मरीज़ ठीक होते हैं, अगर कहीं कोई difficulty आती है तो वो उसे आगे रिफर करता है, और आगे पुनः उसकी चिकित्सा होती है,


दृश्य दो


जब हम कोर्ट में किसी शपथ पत्र के निष्पादन के लिए प्रस्तुत होते हैं तब शपथ पत्र की तमाम कंडिकाओं के बाद नीचे सत्यापन कराया जाता है कि उपरोक्त कंडिका एक से लेकर अमुक नम्बर की कंडिका तक दी गई जानकारी मैंने पूरे होश-ओ-हवाश में मैंने दी है, और मेरे सर्वोत्तम ज्ञान के अनुसार सत्य व सही है,


क्या समझ में आता है इन दृश्यों से..?


पहला यह कि, ज्ञान का अंतिम सोपान हमेशा अछूता रहता है, कोई पूर्ण ज्ञानी नही है, या इसे ऐसा समझ लें कि ज्ञान यदि पूर्ण आकाश है तो हमारी दृष्टि उस आकाश को देख पाने के यंत्र के रुप में बहुत छोटा उपकरण मात्र है, या हम उतना ही आकाश देख पाते हैं जितनी हमारी दृष्टि या हमारी खिड़की का साईज जो हम खोल पाते हैं आकाश को देखने के लिए..!


और दूसरा यह कि, हम अपने बारे में भी जो जानते हैं जो ऑब्जर्व करते हैं, या जो हम अपने स्वयं के जीवन के बारे में बताते हैं वह भी त्रुटिपूर्ण हो सकता है..!


यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो सफलता की संभावना के साथ साथ fault and error की आशंका को भी लेकर चलता है जो किसी से भी और कहीं भी घट सकती है,


लेकिन जैसे ही हम ज्योतिष के क्षेत्र में आते हैं तो हमें ऐसे दावे देखने के लिए मिलते हैं कि मानो इस व्यक्ति के बाद ज्योतिष में और शोध करने की आवश्यकताएं समाप्त हो गई हैं यही है वो जो सारे दुखों से मुक्ति दिला सकता है, 


विज्ञापन भी ऐसे जैसे इसके बाद अगर कुछ न हुआ तो सब खत्म...


मिलिए बंगाली बाबा से, असम के तांत्रिक से, 

प्रेमी प्रेमिका को मिलाए, टूटे घर को बसाए, नौकरी दिलाए, और ब्ला ब्ला ब्ला... और ऊपर से तुर्रा ये कि गारंटीड रिजल्ट.. रिजल्ट न मिले तो पैसे वापस, और खिताब कुछ ऐसे दे दिए जाते हैं इन विज्ञापनों में खुद को जैसे त्रिकालज्ञ, त्रिकालदर्शी, आदि आदि.. एक किसी पुस्तक को पढ़ लेने के बाद स्वयं को शास्त्री लिखने लगते हैं लोग..


या अमुक सेलिब्रिटी एस्ट्रोलोजर, काम की 1000 परसेंट गारंटी, और न जाने क्या क्या, अरे भाई जब 100 में से 101 परसेंट रिजल्ट नही निकल सकता तो 1000 परसेंट क्या अंतरिक्ष से ले आएगा कोई..?


इन सबके कारण आज ज्योतिषियों को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है, दुष्परिणाम वे लोग भोगते हैं जो इसे एक विज्ञान की तरह देखना समझना चाहते हैं,


आज भी ऐसे लोग हैं जो इस विषय पर अटूट श्रद्धा रखते हैं विश्वास रखते हैं किंतु लोगों का एक वर्ग तो इस विषय को विशुद्ध बकवास मानकर बैठा है, एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है कि जो खुद बड़े लंबे समय तक ज्योतिषियों या बाबाओं से ठगाए होते हैं, उसके बाद इनको भी प्रारंभिक ज्ञान तो हो ही जाता है ज्योतिष का, किंतु ये प्रत्येक ज्योतिषी को संदेह की नज़र से देखते हैं और जहां परिणाम आ सकता है उनके संदेह के कारण नही आ पाता,


बहुत से कारण है जो इस विषय पर विश्वास नही जमने देते लोगों के, लेकिन सबसे बड़ा कारण है इस विषय में एकेडमिक शिक्षा का अभाव और इसे विज्ञान के रुप में मान्यता न मिल पाना, 


मैने स्वयं इस विषय पर डिप्लोमा और मास्टर डिग्री लेने के लिए बहुत धक्के खाए हैं तब कहीं जाकर सफलता मिली,


अंततः मैं ये कहना चाहूंगा कि जीवन में कुछ चीजें यदि प्रारब्ध बलवान हों तो बिलकुल नही बदली जा सकतीं, किंतु कुछ चीजों के परिणाम में ज्योतिष की सहायता से अवश्य अनुकूलता लाई जा सकतीं है, यह वो विषय है जिसे वेदों का नेत्र कहा गया है, चार वेदों के बाद जिन छः शास्त्रों की गणना की गई है उनमें एक शास्त्र ज्योतिष भी है, 


सही ज्योतिषी का मिलना, उससे सही विश्लेषण मिलना, उपाय मिलना और उसका फलीभूत होना भी ग्रहों के खेल पर निर्भर करता है, आपके प्रारब्ध पर निर्भर करता है और यदि आप परिश्रम करके ज्योतिषी खोजना चाहते हैं तो उसके लिए श्रम समय और अर्थ तीनों निश्चित रुप से लगेंगे..!


लोग कहते हैं ज्योतिषी डराते हैं ठग लेते हैं, अधिकांश मामलों में यही सही है लेकिन एक दूसरा पहलू भी है, या सही सही कहुं तो ठगाने के लिए तैयार रहते हैं, किसी चमत्कार की उम्मीद में, किसी सिचुएसन को बदल देने के फेर में, लोगों को उपाय के रुप में साधारण जप या पूजा जो वे खुद कर सकें ये बताया जाए तो उसका असर कम पड़ता है न के बराबर, और महंगे अनुष्ठान या खर्चीले प्रोसेस बताया जाय तो उन्हें लगता है हां अब शायद कुछ हो सकता है, 


हां यह सही है इस क्षेत्र में भय दोहन होता है लेकिन हर जगह हो जरूरी नही, 


किसी पर विश्वास न हो तो उसके पास बिल्कुल मत जाइए और यदि गए तो पूर्वाग्रहों को त्याग कर जाएं, अपनी निष्ठा और विश्वास को जागृत रखें, ध्यान रहे ये विषय किसी की बौद्धिक खुजली मिटाने का माध्यम नही है, मर्यादाएं, श्रद्धा और ज्योतिषी की उपलब्धता, उसका और आपका समय सब अनुकुल हो तो परिणाम निःसंदेह अनुकुल ही होंगे,


और ध्यान रहे किसी के पास अलादीन का चराग़ नही है जो घिसे और सबकुछ बदल जाए, विश्लेषण के बाद भी यदि उपायों के प्रति समर्पण का भाव न आए तो कोई क्या करे..?


सच कहुं ...?


समस्याएं जीवन का अनिवार्य हिस्सा है, समस्या नही तो जीवन नही, समस्या और स्वयं के बीच का कार्य कारण संबंध यदि समझ में आए तो उससे सदा के लिए मुक्ति मिल सकती है, एक वर्तुल पूरा हो सकता है,


समस्याओं को सुलझाने के लिए ज्योतिषी न खोजें, इन्हें समझने के लिए ज्योतिषी खोजें... क्योंकि समझ का विकास हर समस्या का दीर्घकालिक निदान है..!


© दिनेश धीवर 'नयन'


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