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हर एक गुनाह का हो, चश्मदीद.. नही होता,
हर एक नेक काम का हो, मुरीद.. नही होता,
जब तक हैं आप काम के, चलते हैं रिलेशन,
बे-मतलब किसी के लिए, कोई मुफीद नही होता,
ये ठोकरें ज़िंदगी में, बहुत काम आती हैं,
कोई यूं ही दुनियादारी से, नाउम्मीद नही होता,
हर एक वफा.. टूटती है, बेवफ़ाई से,
हां, बा-वफाई मतलब, ज़ररखरीद नही होता,
हर काम आपके ज़रूर, लौटाए जाएंगे,
हर काम का लिखा हुआ, रसीद.. नही होता,
अब प्रैक्टिकलिज़्म की, हवा चली 'नयन'
आदमी किसी को देख के, खुशामदीद नही होता,
© दिनेश धीवर 'नयन'
चश्मदीद=आई विटनेस, जिसने घटना घटते हुए देखा हो,
मुफीद= लाभकारी,
बा-वफा= वफा करना, वफा के साथ,
ज़रखरीद= जिस व्यक्ति को कुछ देकर खरीद लिया गया हो,
खुशामदीद= स्वागत करने का भाव,
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