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ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
आ पास आ कि, अपना बना लूं मैं तुझे,
बहुत पराई सी रही हैं मुझसे खुशियां,
तू सुर दे तो आ कि, गा लूं मैं तुझे,
बुझी हुई शामों के साए से उतरता तू है,
बिना कहे मेरे जेहन में पसरता तू है,
तू किस तरह कब घुल सा जाता है तन में,
तमाम रात मेरे साथ सिसकता तू है,
तू वक़्त बता के आ कि, सजा लूं मैं तुझे,
ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
के अब तो रात तेरे साए में गुजरती है,
उम्मीद जीने की हर रात मेरी मरती है,
कहीं तू ठान ना ले जान मेरी लेने को,
के हर सांस दूजी सांस को कतरती है,
आ, रवानगी का सामान बना लूं मैं तुझे,
ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
बग़ैर सीपी के क्या यूं ही मुक्ता होंगे,
क्या सभी रस्म ऐसे ही पुख्ता होंगे,
क्या कुछ हिसाब अधूरे रहेंगे यूं ही मेरे,
या सभी लेन देन यहीं पर चुकता होंगे,
बही खाते 'नयन' के दिखा दूं मैं तुझे,
ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
दिनेश धीवर 'नयन'
ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
आ पास आ कि, अपना बना लूं मैं तुझे,
बहुत पराई सी रही हैं मुझसे खुशियां,
तू सुर दे तो आ कि, गा लूं मैं तुझे,
बुझी हुई शामों के साए से उतरता तू है,
बिना कहे मेरे जेहन में पसरता तू है,
तू किस तरह कब घुल सा जाता है तन में,
तमाम रात मेरे साथ सिसकता तू है,
तू वक़्त बता के आ कि, सजा लूं मैं तुझे,
ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
के अब तो रात तेरे साए में गुजरती है,
उम्मीद जीने की हर रात मेरी मरती है,
कहीं तू ठान ना ले जान मेरी लेने को,
के हर सांस दूजी सांस को कतरती है,
आ, रवानगी का सामान बना लूं मैं तुझे,
ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
बग़ैर सीपी के क्या यूं ही मुक्ता होंगे,
क्या सभी रस्म ऐसे ही पुख्ता होंगे,
क्या कुछ हिसाब अधूरे रहेंगे यूं ही मेरे,
या सभी लेन देन यहीं पर चुकता होंगे,
बही खाते 'नयन' के दिखा दूं मैं तुझे,
ऐ दर्द आ.., सीने से लगा लूं मैं तुझे,
दिनेश धीवर 'नयन'
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